Mohammad Syed Khan Founder of SKBM college

Mohammad Syed Khan Founder of SKBM college

आधुनिक कमसार के शिक्षा जगत के निर्माता के रूप में यदि किसी एक व्यक्ति के नाम का उल्लेख करना हो तो वह डिप्टी सईद खान है

इन्होंने अपनी लगन निष्ठा और योग्यता से जीवन प्रयत्न करके कमसार के लोगों को तालीम हासिल करने के लिए अनेकों प्रकार की कोशिश की उसकी वजह यह है कि हमारे इलाके हमारे क्षेत्र दिलदारनगर में बेहतर शिक्षा ग्रहण करने के लिए एसकेबीएम इंटर कॉलेज साइदो कमसार बार मुस्लिम इंटर कॉलेज की स्थापना की

उप. सैयद एस.बी. कामसर के लोगों के कल्याण और खुशी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है। वह हमेशा जाति और पंथ से ऊपर, नीच और ऊंचे, गरीब और अमीर के बारे में सोचते थे। उन्होंने हमेशा कामसर की शैक्षिक उन्नति का सपना देखा है। उनका कहना था कि कोई भी समुदाय, समाज या क्षेत्र तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक उसके शैक्षिक स्तर में सुधार न हो और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुलभ और हर आम लोगों की पहुंच में न बनाया जाए।

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डिप्टी सईद साहब का जन्म सन 1894 ईस्वी में कमसार के ऐतिहासिक जगह उसियां में हुआ था इन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से बीए की डिग्री प्राप्त की उसके पश्चात इन्होंने पटना कॉलेज पटना में अध्यापन कार्य में लग गए डिप्टी सईद के प्रिय शिष्य जयप्रकाश नारायण थे जिन्होंने लोकनायक पुस्तक की स्थापना की थी

कुछ वर्ष बाद डिप्टी सईद हजारीबाग में कलेक्टर पद पर नियुक्त हुए जिस वक्त डिप्टी सईद कलेक्टर थे उस वक्त गांधी जी को हजारीबाग में गिरफ्तार किया गया था तथा जमानत के लिए डिप्टी शहीद के पास पेश किया गया था उस वक्त अंग्रेजों के दबाव बनाने पर भी डिप्टी सईद ने गांधीजी को आपराधिक आधार ना पाकर जमानत दे दी.

Skbm इन्टर कॉलेज के प्रथम अध्यक्ष डिप्टी सईद खान थे जो कि इस कार्यकाल को 1932 से 1966 तक संभाला उस वक्त विद्यालय के प्रबंधक मोहम्मद समद समसुद्दीन खान थे इन्होंने इस कार्यकाल को 1938 से 1955 तक संभाला तथा प्रथम एसकेवीएम इंटर कॉलेज के प्रथम प्रधानाचार्य मोइनुद्दीन हैदर खान साहब थे जिन्होंने इस कार्यकाल को सन 1940 से 1970 तक संभाला

सैयद खान और महात्मा गांधी के बारे में बहुत प्रसिद्ध कहानी

जब उन्हें डिप्टी के रूप में तैनात किया गया था। इसी अवधि में बिहार के हजारीबाग में कलेक्टर महात्मा गांधी को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार किया था। हजारीाबाद में और गांधी जी जमानत के लिए उनके सामने पेश हुए। ब्रिटिश वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें गांधीजी को जमानत न देने की सलाह दी, लेकिन उप। सैयद शुद्ध राष्ट्रवादी और ईमानदार अधिकारी थे, जब उन्हें गांधीजी के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला तो उन्होंने उन्हें जमानत दे दी। परिणामस्वरूप ब्रिटिश अधिकारी ने एक बैठक बुलाई और उप के साथ दुर्व्यवहार किया। सैयद जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर सका और उसी बैठक में उस अधिकारी को जोरदार जवाब दिया। इसलिए उस वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।

उन्होंने इस वरिष्ठ अधिकारी के फैसले के खिलाफ बिहार के राज्यपाल से अपील की. संयोग से वही अधिकारी बाद में बिहार का राज्यपाल बना, तब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने Deputy Mohammad Syed Khan को बुलाया। उनसे माफी मांगी और उनकी नौकरी बहाल कर दी। लेकिन अपने फैसले में उन्होंने एक शब्द लिखा कि उप. सैयद को उनके करियर में कभी भी पदोन्नति नहीं दी जाएगी। यह उनका एक महान गुण था कि ज्यादातर मामलों में उन्हें समझौता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

15 अगस्त 1947 को जब भारत को स्वतंत्रता मिली तो राजनीतिज्ञ श्री जयप्रकाश नारायण जो कि उप के छात्र थे। सैयद एस.बी. उसे बढ़ावा देने की कोशिश की लेकिन उसने यह कहते हुए मना कर दिया कि यह अच्छा और वांछनीय नहीं है कि एक शिक्षक को अपने छात्र से पदोन्नति मिले। फिर बिहार सरकार इस मामले को विधानसभा (बिधानसभा) में लाया और यह कहते हुए आदेश पारित किया कि उन्हें एक विशेष उप का पद दिया जाना चाहिए। मजिस्ट्रेट जब तक वह सेवा करना चाहता था।

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